मरना,
हो सकता है एक घटना हो आपके लिए;
पर मेरे लिए तो
मरना
एक सतत् प्रक्रिया है।
महज़ शरीर का शेष रहना,
प्राणों का प्रवाह,
साँसों की डोर का बने रहना
जीवन नहीं है मेरे लिए;
और न ही
साँसों का थमना,
प्राणों का छूटना, और
शरीर का शिथिल पड़ना ही
मौत है मेरे लिए।
मौत है
जीने की वजह का न रह जाना,
मौत है
सपने का शेष नहीं रह जाना!
मौत है
मानवीय संवेदनाओं का लोप,
मौत है
मानव के विवेक पर चोट;
मौत है
उन मूल्यों का अंत,
जो हमें जीने की वजह देते हैं;
मौत है
उन सपनों का अंत,
जिसे पूरा करने को हम तत्पर रहते हैं;
मौत है
अपने स्वत्व को खो देना;
मौत है
भीड़ में तब्दील हो जाना!
मौत होती है तब, जब
ख़ुद को खराद पर चढ़ाना आप बंद कर देते हैं;
मौत होती है तब, जब
खुद को पुनर्परिभाषित करना छोड़ देते हैं!
मौत होती है तब, जब
आपके शब्द अर्थ खो देते हैं;
मौत होती है तब, जब
आपके ज़ज्बात आपका साथ छोड़ देते हैं;
मौत होती है तब, जब
फ़र्क़ नहीं पड़ता है आपको;
मौत होती है तब, जब
ग़ुस्सा नहीं आता है आपको;
मौत होती है तब, जब
आप हर्ष-विषाद से परे हो जाते हैं;
मौत होती है तब, जब
‘दुलत्ती’ को नियति मान
आप चुप रह जाते हैं;
मौत होती है तब, जब
आप अपमान का घूँट पीकर रह जाते हैं!
मौत कोई सामान्य परिघटना नहीं,
सपनों का न रह जाना ही मौत है,
अपनों का न रह जाना ही मौत है,
ख़ुद का न रह जाना ही मौत है,
सुध का न रह जाना ही तो मौत है!
आँसू जब साथ छोड़ दे,
तो मौत है;
अहसास जब साथ छोड़ दे,
तो मौत है;
मौत हुई ‘होरी’ की,
जब उसने बेटी बेची थी;
मौत हुई ‘धनिया’ की,
जब उसने सुतली की कमाई
दातादीन को सौंपी थी!
मौत मेरी भी होगी,
जब ख़ुद को सौंपूँगा;
मौत मेरी भी होगी,
जब अपना ज़मीर बेचूँगा;
पल-पल मरूँगा, जब
लड़ना छोड़ूँगा;
मौत मेरी भी होगी, जब
खुद से नाता तोड़ूँगा!
मरना तो मुझे भी है, पर
मरूँगा मैं लड़-लड़कर;
जीने की कोशिश करूँगा,
आगे बढ़-बढ़कर;
मरूँगा मैं भी
तिल-तिलकर,
घुल-घुलकर!
हो सकता है एक घटना हो आपके लिए;
पर मेरे लिए तो
मरना
एक सतत् प्रक्रिया है।
महज़ शरीर का शेष रहना,
प्राणों का प्रवाह,
साँसों की डोर का बने रहना
जीवन नहीं है मेरे लिए;
और न ही
साँसों का थमना,
प्राणों का छूटना, और
शरीर का शिथिल पड़ना ही
मौत है मेरे लिए।
मौत है
जीने की वजह का न रह जाना,
मौत है
सपने का शेष नहीं रह जाना!
मौत है
मानवीय संवेदनाओं का लोप,
मौत है
मानव के विवेक पर चोट;
मौत है
उन मूल्यों का अंत,
जो हमें जीने की वजह देते हैं;
मौत है
उन सपनों का अंत,
जिसे पूरा करने को हम तत्पर रहते हैं;
मौत है
अपने स्वत्व को खो देना;
मौत है
भीड़ में तब्दील हो जाना!
मौत होती है तब, जब
ख़ुद को खराद पर चढ़ाना आप बंद कर देते हैं;
मौत होती है तब, जब
खुद को पुनर्परिभाषित करना छोड़ देते हैं!
मौत होती है तब, जब
आपके शब्द अर्थ खो देते हैं;
मौत होती है तब, जब
आपके ज़ज्बात आपका साथ छोड़ देते हैं;
मौत होती है तब, जब
फ़र्क़ नहीं पड़ता है आपको;
मौत होती है तब, जब
ग़ुस्सा नहीं आता है आपको;
मौत होती है तब, जब
आप हर्ष-विषाद से परे हो जाते हैं;
मौत होती है तब, जब
‘दुलत्ती’ को नियति मान
आप चुप रह जाते हैं;
मौत होती है तब, जब
आप अपमान का घूँट पीकर रह जाते हैं!
मौत कोई सामान्य परिघटना नहीं,
सपनों का न रह जाना ही मौत है,
अपनों का न रह जाना ही मौत है,
ख़ुद का न रह जाना ही मौत है,
सुध का न रह जाना ही तो मौत है!
आँसू जब साथ छोड़ दे,
तो मौत है;
अहसास जब साथ छोड़ दे,
तो मौत है;
मौत हुई ‘होरी’ की,
जब उसने बेटी बेची थी;
मौत हुई ‘धनिया’ की,
जब उसने सुतली की कमाई
दातादीन को सौंपी थी!
मौत मेरी भी होगी,
जब ख़ुद को सौंपूँगा;
मौत मेरी भी होगी,
जब अपना ज़मीर बेचूँगा;
पल-पल मरूँगा, जब
लड़ना छोड़ूँगा;
मौत मेरी भी होगी, जब
खुद से नाता तोड़ूँगा!
मरना तो मुझे भी है, पर
मरूँगा मैं लड़-लड़कर;
जीने की कोशिश करूँगा,
आगे बढ़-बढ़कर;
मरूँगा मैं भी
तिल-तिलकर,
घुल-घुलकर!